शुक्रवार, नोव्हेंबर 28, 2014
   
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पुण्यप्रभाव अंक पहिला


मंगलाचरण

(सरस सीस मुगुट मार.)
प्रभुपदास नमित दास मंगलमात्रास्पदा वरदा सदवनिं लव
यदवलंब विलंब न करि हरि दुरिता सौख्य वितरि ॥धृ.॥
सारस्वतचरणकमल-। दलिं विरहत कविमंडल दुर्लभ
ते दिव्य स्थल। पंकनिरत। राम रमत। धन्य तरी॥ 1॥